History of Football in Hindi

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Football.

फुटबॉल (Football) दुनिया मे सबसे लोकप्रिय खेल है और इसे पूरी दुनिया के हर देश खेलते है। यह अनुशासन का और फिटनेस का खेल है। इस खेल का (World Cup) हर 4 साल में आयोजित होता है। इस खेल को खेलने वाले प्रमुख देशो में ब्राजील, जर्मनी, अर्जेटीना, स्पेन जैसे देश आते है। भारत मे भी यह खेल बहुत लोकप्रिय है लेकिन क्रिकेट जितना नही है।

फुटबॉल का इतिहास History Of Football In Hindi

फुटबॉल (Football) शब्द को लेकर अलग अलग राय है कुछ के अनुसार बॉल को पैर से मारा जाता है इसलिए इस खेल का नाम फुटबॉल पड़ा था। वेसे फुटबॉल खेल की शुरुआत चीन देश की मानी जाती है। फुटबॉल खेल चीन के सुज़ु खेल का ही एक विकसित रूप है। इस खेल को जापान में भी केमरी के नाम से खेला जाता था। फुटबॉल नाम से यह खेल 15 वी शताब्दी में स्कॉटलैंड में खेला जाता था।

21 मई 1904 को यूरोप के सात बड़े देशो ने मिलकर फीफा का गठन किया जो इस खेल की देख रेख कर सके। इन सात देशो में बेल्जियम,नीदरलैंड, फ्रांस, डेनमार्क, स्वीडन,स्विट्जरलैंड और स्पेन थे। इस संस्था के प्रथम अध्यक्ष रोबर्ट गुरीन थे।

वर्तमान में फुटबॉल पूरी दुनिया मे खेला जाता है। इस खेल का विश्वकप भी हर 4 साल में आयोजित किया जाता है। यूरोप और अमेरिका में इस खेल के कई क्लब स्थापित है जिनके टूर्नामेंट आयोजित होते है जैसे रियल मेड्रिड, बार्सिलोना, मेनचेस्टर यूनाइटेड। फुटबॉल के इतिहास में कई ऐसे महान खिलाड़ी हुए है जिन्होंने अपने खेल के जादू से इस खेल के प्रति लोगो को दीवाना बनाया है। इनमे , माराडोना, जिडाने, रोनाल्डो, मैसी जैसे खिलाड़ी प्रमुख है।

भारतीय फुटबॉल का इतिहास History Of Indian Football In Hindi

भारत में भी इस खेल का इतिहास बहुत ही रोचक है। वेसे तो इंडिया में क्रिकेट ज्यादा लोकप्रिय है लेकिन इंडिया के कुछ राज्य जैसे पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्य में फुटबॉल ज्यादा खेला जाता है।

भारत मे फुटबॉल को लोकप्रिय करने के पीछे जिस आदमी का हाथ था उनका नाम नागेन्द्र प्रसाद सर्वाधिकारी था। इनको भारतीय फुटबॉल का जनक भी कहा जाता है। स्कूल के मैदान से इस खेल की शुरुआत की गई थी और उसके बाद नागेन्द्र प्रसाद जी ने इस खेल को कई और स्कूलों में शुरू किया। नागेन्द्र जी ने बॉयज़ क्लब भी बनाया था और 1880 तक कोलकाता में कई फुटबॉल क्लब बन गए जिनके बनने में नागेन्द्र प्रसाद जी का हाथ था।

इसके बाद उन्होंने सोवाबाजार नामक क्लब बनाया और इस क्लब का पहले सदस्य का नाम मोनी दास था जो मोहन बागान के कप्तान भी रहे थे। सन 1950 में भारत ने वर्ल्डकप के लिये क्वालीफाई भी किया था लेकिन भारतीय टीम के पास वर्ल्डकप में जाने तक के पैसे नही थे और भारत ने वर्ल्डकप की जगह ओलंपिक को तरजीह दी, इसलिये भारत फीफा वर्ल्डकप नही खेल पाया था।

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